बसंत पञ्चमी विशेष…

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अपना भारत धर्म-प्रधान देश है यहाँ हर ऋतुओं में धार्मिक और पौराणिक कथाओं एवं मान्यताओं के अनुसार विभिन्न त्यौहार मनाये जाते है | भारतवर्ष में कुल छ: अलग-अलग ऋतुएँ हैं और सबकी अपनी अलग-अलग पहचान है | समस्त ऋतुएं अपने क्रम से आती हैं और वर्ष में सबको दो-दो माह का समय मिलता है जबकि मुख्य रुप से तीन ऋतुएं गर्मी, बरसात एवं जाड़ा होती हैं। शीत ऋतु के बीतने के उपरांत बसंत का आगमन होता है। बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा गया है। हिंदू धर्म में बसंत ऋतु के आगमन पर बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन ही माता सरस्वती प्रकट हुई थी और इस दिन देशभर में देवी सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है। इस चलते इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है |

मां सरस्वती को विद्या और संगीत की देवी कहा जाता है और ऐसी मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती का पूजन करने पर विद्या और संगीत में निपुणता का वरदान मिलता है | प्रतिवर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर बसंत पञ्चमी का त्यौहार मनाया जाता है | इस वर्ष 26 जनवरी, गुरुवार के दिन बसंत पंचमी मनाई जा रही है | यह त्यौहार प्रकृति में ज्ञान, कला तथा जीवन के सृजन के आरम्भ का त्यौहार है | यह त्यौहार है- खेतों में लहलहाते सरसों के पीले-पीले फूलों का, आम, लीची, जामुन सहित अन्य फलदार पेंडो पर सुनहरे रंग के मंजर लगने की तैयारी का, मनुष्य, पशु-पक्षी, पेंड-पौधों में एक नई दिव्य चेतना के आरम्भ का | इस समय फूलों में बहार आ जाती हैं | रंग-बिरंगी तितलियाँ उमड़-घुमड़ के फूलों पर मडराने लगती हैं | चारो तरफ ऐसे लगता है जैसे प्रकृति स्वर्ण रूपी चादर ओढ़े अपनी छटा बिखेर रही है और परम पिता ब्रह्मा की रचना में चार चाँद लगा रही है | प्रकृति अपने मनमोहिनी रूप से सभी पेड़-पौधे, जीव-जन्तु को अपने ओर आकर्षित कर रही होती है |

पौराणिक कथाओं के अनुसार परम पिता श्री ब्रम्हाजी जब संसार की रचना किये तो पेड़-पौधे और जीव-जन्तु सब कुछ दिख रहे थे बावजूद इसके वो अपने सृजन से खुश नहीं थे | उन्हें कुछ कमी सी लग रही थी तब उन्होंने अपने कमण्डल से जल निकाला और पृथ्वी पर छिडका उसके बाद एक सुन्दर स्त्री का प्राकट्य हुआ | जब वो स्त्री प्रकट हुईं  तो उनके एक हाथ में वीणा दुसरे हाथ आशीर्वाद मुद्रा मे था वहीँ  दो अन्य हाथों में माला और पुस्तक शुशोभित हो रहे थे | कथाओं के अनुसार इन सुन्दर देवी ने वीणा को नाद किया तो संसार के सभी रचना को वाणी प्राप्त हुई चारो तरफ कौतूहलता होने लगीं तरह-तरह जीवों की मधुर आवाजें सुनाई देने लगीं | झरनों से कल-कल की आवाजें सुनानी देने लगीं, पौधों और उनकी पत्तियों से सरसराहट की आवाजें निकलनी शुरू हो गयीं |  

इसपर ब्रह्मा जी बहुत प्रसन्न हुए और उस देवी का नाम विणा की देवी से संबोधित करते हुए वागेश्वरी नाम दिये | इन देवी को माँ सरस्वती, शारदा, शतरूपा, भारती आदि कई नामों से जाना जाता है |

वसंत पंचमी के ठीक चालीस दिन बाद होली आती है, इसलिए बसंत पंचमी होली की तैयारी का प्रतीक भी माना गया है। वसंत पंचमी का त्योहार ज्ञान, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। इस दिन स्कूलों और कॉलेजों के साथ-साथ छात्र मंदिरों में देवी सरस्वती की पूजा करते हैं। आज के दिन हीं नन्हे बच्चों को विद्या का आरम्भ कराया जाता है उनके हाथों में कलम, कॉपी, पेन्सिल इत्यादि पकड़ा कर माँ शारदा से इन बच्चो के उज्जवल भविष्य की आशीर्वाद माँगा जाता है |

आज का दिन किसी भी कार्य को शुरू करने के लिए शुभ माना गया है | खासकर इस दिन को सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त की संज्ञा दी गयी है | यह त्यौहार शिशिर ऋतू के बाद नई फसल के अंकुरित होने की ख़ुशी में मनाया जाता है | इस दिन किसान अधिक फसल होने का आशीर्वाद मांगते हैं |

Alok Bachan (Author of this Page)